10/02/2026
वंश मशरूम फार्म: कॉर्पोरेट ऑफिस से खेतों की मिट्टी तक का सफर
एक नई सोच की शुरुआत
साल 2020 में, जब पूरी दुनिया ठहर गई थी, तब लखीसराय के रामपुर गाँव के रहने वाले अमित कुमार एक बड़े फैसले पर खड़े थे। पुणे के आईटी सेक्टर में एमबीए (MBA) की डिग्री के साथ एक सफल करियर बनाने के बाद, महामारी उन्हें वापस अपनी जड़ों की ओर ले आई। लेकिन अमित ने इसे एक रुकावट नहीं, बल्कि एक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने ठान लिया कि वे अब केवल नौकरी नहीं करेंगे, बल्कि अपने क्षेत्र में रोजगार पैदा करेंगे।
चुनौतियाँ और सफलता का मंत्र:
शुरुआत आसान नहीं थी। यूट्यूब से सीखकर लगाए गए पहले 7 किलो बीजों ने अमित को सिखाया कि खेती में केवल मेहनत नहीं, बल्कि सही ट्रेनिंग की भी जरूरत है। उन्होंने हार नहीं मानी और सोलन (हिमाचल प्रदेश) के मशरूम अनुसंधान निदेशालय से विधिवत प्रशिक्षण लिया। यहीं से अमित का 'मैनेजमेंट माइंडसेट' और 'किसानी का जज्बा' एक साथ मिल गए।
वंश मशरूम फार्म: आज का गौरव
आज, वंश मशरूम फार्म 15,000 स्क्वायर फीट में फैला बिहार का एक अग्रणी फार्म है। यहाँ प्रतिदिन 70-80 किलो से ज्यादा ताजे मशरूम का उत्पादन होता है। लेकिन अमित केवल कच्चे माल तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने 'वैल्यू एडिशन' (मूल्य संवर्धन) पर ध्यान दिया:
सूखे मशरूम और पाउडर: सेहत और स्वाद का खजाना।
मशरूम का अचार: बिहार के पारंपरिक मसालों और आधुनिक स्वास्थ्य का संगम।
मशरूम बेकरी: बिस्कुट और कुकीज़ के माध्यम से बच्चों और बड़ों को पोषण।
हमारा लक्ष्य: सबका साथ, सबका विकास
अमित कुमार का विजन सिर्फ अपना फार्म चलाना नहीं है। उन्होंने अब तक 1,000 से ज्यादा स्थानीय किसानों और महिलाओं को मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दी है। उनका लक्ष्य लखीसराय को बिहार का "मशरूम हब" बनाना है।
जब आप "वंश मशरूम फार्म" का कोई भी उत्पाद चुनते हैं, तो आप केवल एक सुपरफूड नहीं खरीदते, बल्कि आप बिहार के एक युवा किसान के उस सपने का समर्थन करते हैं जो गाँव की मिट्टी को सोना बनाने की ताकत रखता है।