01/04/2022
आरे! धरीछन बाबा, तूं ? (याद क के) ओ हो, हम त एकदम भुला गइल रनी हं जे बाबा काल्हुए नाया-नाया बिआह क के घर बसवलें हऽ। बांह झुराइल, लकड़ी अइसन टांग आ सूखल चाम पर तोहार पीयर धोती देख के त मिजाज लहालोट हो गइल! खोढ़िला खानी धंसल आंख के सिकुड़ल कोर पर कागज अइसन लागता जइसे बुझे खाती धुकधुकात दीया पर टेम के करिखा फइल गइल होखे। बिना दांत के मुँह में पान चाभ तारऽ त बुझा ता जे झगड़ू लोहार के भाथी चल रहल बा। अच्छा बाबा, हम ढ़ेर देर तले बिलमेब ना हमरा के देख के सिटपिटात काहे बाड़ऽ .........ऐ ? का कह ताड़? तोहार बतिया हमरा सुनात नइखे, ऐ दुखहारन - कान से कुछ ऊंच सुनीले, ओ-हो-हो-हो (व्यंग्य के हंसी का साथे) ई त हमहू बूझ तानी जे तूं ऊंच सुनेल! बाकी हमरा नजर में त तहार काने ना, आँख, मुँह, हाथ, गोड़ आ दिमाग - सब ऊँचे काम करे लेसऽ ए बाबा! ...... का कह ताड़ ? ‘का करीं, घर में केहू करनीहार ना रहे, लोग बलजोरी बिआह करा देलस!‘ .......... हं, हं, बात ठीके कह ताड़ऽ घर में जवान बेटा के कुंआर रखले बाड़ऽ ..... अच्छा, नीमन कइलऽ मूवे का बेरी में घर बसा लेलऽ! ऐ? का कह गइलऽ ‘हमरा सामने मूवे के नांव मत ल, नया नया शादी क के ले आइल बानी आ तूं आजुवे असगुन मनावे लगलऽ‘......... ना, ना, के कहता जे तूं जलदिए मर जइब। तूं त शादी के इमरित पी के अघा गइल बाड़ऽ। जमराजो का तहरा लगे आवे में दू-चार बार सोंचे के पड़ जााई। का बोल ताड़ऽ ‘इमरित मत कह ए दुखहारन, हम त एह शादी में बिका गइनी, बरबाद हो गइनी! जवनो आठ-दस काठा खेत बांचल रल ओकरो के बेंचि के एही में लगा देनी, सउदा बाड़ा महंगा पड़ल! सउदा! (व्यंग्य के हंसी) कवनो बात ना, सउदा चोख मिलल बा नूं बाबा! का कह ताड़? ‘अगर ईहे रहि त अफसोसे कवना बात के रलऽ समुझिह जे नौ बरिस के नेउरी बझा के ले आइल बानी - अबहीं बाड़ा पोसे के पड़ी हो!‘ ...... त नौ बरिस के नेउरिया बीया नू ? फिकिर मत करऽ नेउरी छोट भी होखे त बड़का बड़का सांपन के भी चबा जाये के ताकत रखेले। ई त नौ बरिस के बीया! ...... आछा, तनी हमरा नयकी नौबरखी आजी के देखइब ना? का कह ताड़ ‘भगबे कि ना एजा से - ई तोड़ आजी ना हिय, भउजी कहिहे भउजी।..... आछा, तहरे कहल नाम ठीक, तूं हमार बाबा, उ हमार भउजी!...... ओह! (हुछ इयाद क के) हम ई कवना बतबंगड़ में लागि गइनी! बाहर बरखा छूटि गइल। अब हमरा एजा से घिसके के चाहीं। आछा बाबा, राधाकिसिन के जोड़ी बनल रहो, हम चल तानी ........
(दूर से मस्ती में गीत गावे के आवाज - ‘नन्हका बलमुआ ले के सुतलीं अंगनवां बनवारी हो जड़ि गइलें एड़ी से कपार! चुप होखु, चुप होखु, नन्हका बलमुआं बनवारी हो रहरी में बोलेला सिआर!)