01/03/2026
إِنَّا لِلَّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
आपकी बहादुरी को हमारी नस्ल ने अपनी आँखों से देखा है, और हमारे नस्ले भी इसे याद रखेंगे। हमारे और उनके ज़ेहन में आपका नाम हमेशा ज़िंदा रहेगा। आने वाली नस्लों को वे ज़रूर बताएँगे कि हमने वह दौर देखा था जब ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद आयतुल्लाह अली ख़ामनेई 86 साल के एक बुज़ुर्ग मगर अटल मुजाहिद तन्हा खड़े होकर अमेरिका और इस्राइल के ज़ायोनिस्ट ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर मुकाबला कर रहे थे।
उन्होंने इस्राइल को चुनौती दी, अमेरिका के सामने झुके नहीं, और दुनिया की सुपर पावर कही जाने वाली ताक़त के घमंड को ललकारा।
जब कुछ इस्लामी मुल्कों के हुक्मरान फ़िलस्तीन और ग़ज़ा में मासूमों पर हो रहे ज़ुल्म और क़त्ल-ए-आम को ख़ामोशी से देखते रहे, बे-हिसी की नींद में डूबे रहे — तब भी ख़ामनेई इस उम्र में साबित-क़दम रहे। न थके, न झुके; बल्कि हक़ की आवाज़ बुलंद करते रहे।
यह तारीख़ का वह बाब है जिसे आने वाली नस्लें हैरत और फ़ख़्र के साथ पढ़ेंगी।
अल्लाह मरहूम को मग़फ़िरत अता फ़रमाए और ईरान को इस इम्तिहान में कामयाबी और फ़तह नसीब करे।